Yash Arora
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पेट की जलन बढ़ाती हैं ये चीजें: बवासीर के मरीज़ ज़रूर पढ़ें

बवासीर का दर्द असहनीय हो सकता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी रसोई में ही कई ऐसी चीजें हैं जो इस पीड़ा को और बढ़ा देती हैं? तीखा, तला हुआ और फाइबर रहित भोजन आपकी नसों की सूजन को बढ़ाता है। जानिए उन ‘दुश्मन’ खानों को जिनसे आपको तुरंत दूरी बना लेनी चाहिए।

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आप सोच रहे होंगे कि बवासीर या खूनी बवासीर सिर्फ एक दर्द है, जिससे छुटकारा पाना मुश्किल है। हाँ, दर्द तो है… कभी-कभी तो ऐसा लगता है जैसे टॉयलेट सीट पर बैठकर कोई ‘आग’ लगा रहा हो! लेकिन क्या आप जानते हैं, इस ‘आग’ को भड़काने में सबसे बड़ा हाथ किसका है? आपके खाने की प्लेट का!

सोचिए, आपने एक तरफ दवाई खाई, देसी नुस्खे अपनाए, लेकिन दूसरी तरफ आपने बिरयानी के साथ तीखी लाल मिर्च का तड़का लगा दिया… तो क्या फायदा हुआ? आपने खुद ही अपनी मेहनत पर पानी फेर दिया |

बवासीर कोई साधारण बीमारी नहीं है, यह तब होती है जब आपके गुदा और मलाशय की नसें सूज जाती हैं। यह सूजन कब्ज के कारण और बढ़ जाती है। और कब्ज का सीधा कनेक्शन आपके पेट में गए हुए भोजन से है।

इसलिए, अब समय आ गया है कि हम उन खाद्य पदार्थों को पहचानें, जो आपके बवासीर के दर्द को कम नहीं, बल्कि कई गुना बढ़ा देते हैं। अपनी डाइट से इन्हें हटाओ, और देखो, कितनी जल्दी आपको आराम मिलता है। यह ब्लॉग सिर्फ एक लिस्ट नहीं है, यह आपके पेट की शांति का ‘मैनुअल’ है!

बवासीर के दर्द को तुरंत बढ़ाने वाले ख़तरनाक खाद्य पदार्थ

बवासीर से पीड़ित व्यक्ति को अपने आहार में बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। यहाँ उन 11 प्रमुख खाद्य पदार्थों की सूची दी गई है, जिन्हें आपको पूरी तरह से या कम से कम कुछ समय के लिए ‘टाटा-बाय-बाय’ कह देना चाहिए:

मसालेदार और तीखे खाद्य पदार्थ

क्यों बचें:

  • पेट में ‘आग’: यह बवासीर के मरीजों के लिए सबसे बड़ा ‘विलेन’ है। लाल मिर्च पाउडर, हरी मिर्च का ज़्यादा उपयोग, गरम मसाला, और तीखी सॉस खाने से, आपका पेट भले ही ख़ुश हो जाए, लेकिन आपकी बवासीर की समस्या ‘डबल’ हो जाती है।
  • मल त्याग में परेशानी: जब आप बहुत ज़्यादा तीखा खाना खाते हैं, तो यह सीधे आपके मल को भी तीखा कर देता है। कल्पना कीजिए, पहले से ही सूजी हुई नसों पर जब यह तीखा मल गुज़रता है, तो कितना दर्द और जलन होगी। यह जलन शौच के बाद घंटों तक बनी रह सकती है। यह मल त्याग की क्रिया को दर्दनाक और कठिन बना देता है।

क्या करें:

  • हल्दी, धनिया, जीरा जैसे हल्के मसालों का प्रयोग करें। मिर्च की जगह काली मिर्च का इस्तेमाल कम मात्रा में कर सकते हैं।

डीप-फ्राइड और तेल वाले खाद्य पदार्थ

क्यों बचें:

  • पचाने में मुश्किल: समोसा, कचौरी, पकौड़े, या ज़्यादा तेल में बनी सब्ज़ियाँ (जैसे पूड़ी) पचाने में बहुत भारी होते हैं। इनमें फैट (वसा) की मात्रा बहुत ज़्यादा होती है।
  • पाचन क्रिया धीमी: ज़्यादा तेल वाला खाना पाचन क्रिया को धीमा कर देता है, जिससे भोजन को पेट से आँतों तक पहुंचने में ज़्यादा समय लगता है। इससे कब्ज की समस्या और बढ़ जाती है, और आपको मल त्याग करते समय ज़्यादा ज़ोर लगाना पड़ता है। ज़्यादा ज़ोर लगाने से बवासीर की नसें फिर से सूज जाती हैं।

क्या करें:

  • खाने को तलने की बजाय बेक, ग्रिल या भाप में पकाएँ। कम तेल का प्रयोग करें।

मैदा से बनी चीजें

क्यों बचें:

  • फाइबर का अभाव: मैदा, जो कि गेहूं को बहुत ज़्यादा पीसकर बनाया जाता है, में फाइबर लगभग न के बराबर होता है। फाइबर वह चीज़ है जो आपके मल को नरम और मोटा बनाता है।
  • कब्ज का कारण: जब आप ब्रेड, बिस्कुट, नान, या पेस्ट्री जैसी मैदे की चीज़ें खाते हैं, तो यह आँतों में जाकर एक ‘गोंद’ जैसा बन जाता है। इससे मल कठोर हो जाता है, और कब्ज होने की संभावना बहुत बढ़ जाती है। बवासीर के मरीजों के लिए कब्ज सबसे बड़ा दुश्मन है।

क्या करें:

  • मैदा की जगह साबुत अनाज, ओट्स , और आटे की रोटी खाएं।

रेड मीट

क्यों बचें:

  • फाइबर-रहित: माँस, खासकर रेड मीट (जैसे: बकरे का माँस या बीफ), प्रोटीन और वसा से भरा होता है, लेकिन इसमें फाइबर बिल्कुल नहीं होता।
  • धीरे-धीरे पचना: रेड मीट को पचाने में शरीर को बहुत ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है, और यह पाचन तंत्र में लंबे समय तक टिका रहता है। इससे कब्ज होने की संभावना बढ़ जाती है।

क्या करें:

  • माँस खाने से बचें। अगर खाना ही है, तो मछली (या चिकन को कम तेल में पकाकर खाएं, और उसके साथ भरपूर मात्रा में सब्ज़ियाँ (जिसमें फाइबर हो) ज़रूर लें।

शराब

क्यों बचें:

  • डिहाइड्रेशन: शराब शरीर को डिहाइड्रेट कर देती है, यानी शरीर में पानी की कमी कर देती है।
  • मल कठोर होना: जब शरीर में पानी की कमी होती है, तो शरीर आँतों से पानी खींचना शुरू कर देता है। इससे मल सूख जाता है और कठोर हो जाता है। कठोर मल का मतलब है कब्ज और बवासीर में तीव्र दर्द।
  • पाचन क्रिया पर प्रभाव: शराब पाचन क्रिया को भी अस्त-व्यस्त कर देती है, जिससे शौच के समय असुविधा होती है।

क्या करें:

  • शराब से पूरी तरह परहेज़ करें। इसके बजाय, दिन भर में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं।

कैफीन वाले पेय

क्यों बचें:

  • डिहाइड्रेशन में वृद्धि: चाय और कॉफी में कैफीन की मात्रा ज़्यादा होती है। कैफीन भी शराब की तरह शरीर को डिहाइड्रेट करने का काम करता है, जिससे मल सूख जाता है।
  • आँतों पर दबाव: कुछ लोगों में कैफीन आँतों पर दबाव डालकर अचानक मल त्याग की इच्छा पैदा करता है, जो बवासीर के मरीजों के लिए अच्छा नहीं है।

क्या करें:

  • दिन में एक या दो कप से ज़्यादा चाय/कॉफी न पिएं। कैफीन की जगह हर्बल चाय या नींबू पानी का सेवन करें।

ज़्यादा नमक वाले खाद्य पदार्थ

क्यों बचें:

  • शरीर में पानी रोकना: ज़्यादा नमक या सोडियम वाले खाद्य पदार्थ खाने से शरीर पानी को रोककर रखता है।
  • रक्त वाहिकाओं पर दबाव: यह रुका हुआ पानी आपके रक्त वाहिकाओं में दबाव बढ़ाता है। चूँकि बवासीर भी सूजी हुई रक्त वाहिकाएं हैं, इसलिए उनमें सूजन और दर्द और ज़्यादा बढ़ सकता है।
  • उदाहरण: पैकेट वाले चिप्स, ज़्यादा नमक वाला अचार, और डिब्बा बंद सूप/खाना।

क्या करें:

  • बाहर के पैकेट वाले स्नैक्स खाने से बचें और घर के खाने में नमक कम इस्तेमाल करें।

डेयरी उत्पाद

क्यों बचें:

  • पचाने में भारी: कुछ लोगों को, खासकर लैक्टोज इनटॉलरेंस वाले लोगों को, दूध, पनीर और चीज़ जैसे डेयरी उत्पाद पचाने में मुश्किल होती है।
  • कब्ज का कारण: डेयरी उत्पाद बवासीर के दौरान मल को और ज़्यादा कड़ा बना सकते हैं, खासकर यदि आप पहले से ही कब्ज से पीड़ित हैं।

क्या करें:

  • डेयरी उत्पादों का सेवन कम करें या थोड़े समय के लिए बंद कर दें। छाछ या दही जिसमें प्रोबायोटिक्स होते हैं, उन्हें कम मात्रा में लिया जा सकता है, क्योंकि वे पाचन में मदद करते हैं।

कच्चा केला

क्यों बचें:

  • स्टार्च की अधिकता: कच्चा केला स्टार्च से भरा होता है, जिसे पचाना मुश्किल होता है।
  • कब्ज कारक: यह पेट में जाकर कब्ज पैदा कर सकता है और मल को कठोर बना सकता है।

क्या करें:

  • पके हुए केले खाएं। पका हुआ केला फाइबर का अच्छा स्रोत है और मल को नरम बनाने में मदद करता है।

कुछ ख़ास दालें

क्यों बचें:

  • गैस और सूजन: कुछ दालें, जैसे कि राजमा, चना और उड़द की दाल, कुछ लोगों के पेट में ज़्यादा गैस और सूजन पैदा कर सकती हैं।
  • पेट पर दबाव: जब पेट में ज़्यादा गैस बनती है, तो यह आँतों पर दबाव डालती है। यह दबाव बवासीर की नसों को परेशान कर सकता है।

क्या करें:

  • दालों को रात भर भिगोकर रखें और उबालते समय उसका पानी बदल दें। इससे गैस बनाने वाले तत्व कम हो जाते हैं। हल्की दालें, जैसे मूंग दाल, बेहतर होती हैं।

प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ

क्यों बचें:

  • फाइबर और पोषण की कमी: पैकेज्ड और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों (जैसे: फ्रोजन पिज्जा, इंस्टेंट नूडल्स, पैक किए गए जूस) में न तो ज़रूरी फाइबर होता है और न ही पोषण।
  • एडिटिव्स: इनमें कृत्रिम रंग, प्रिज़र्वेटिव, और अत्यधिक नमक/चीनी होती है, जो पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचाती है और कब्ज को बढ़ावा देती है।

क्या करें:

  • ताज़ा पका हुआ घर का खाना खाएं। प्रकृति द्वारा दिए गए ताज़े फल, सब्ज़ियाँ और साबुत अनाज ही आपका सबसे अच्छा उपचार हैं।

निष्कर्ष: आपका पेट, आपकी जिम्मेदारी!

तो दोस्तों, यह थी बवासीर को न्योता देने वाले ख़तरनाक खाद्य पदार्थों की लिस्ट। बवासीर का इलाज केवल दवाइयों से नहीं होता, इसका बड़ा हिस्सा आपके जीवनशैली और आहार पर निर्भर करता है।

जब आप इन चीज़ों को ‘ना’ कहेंगे, और उनकी जगह ज़्यादा फाइबर वाले खाद्य पदार्थ (जैसे: हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, पपीता, दलिया) और खूब पानी को ‘हाँ’ कहेंगे, तो आप देखेंगे कि शौच करना कितना आसान और दर्द रहित हो जाता है।

याद रखें, आपके गुदा के पास की नसें सूजी हुई हैं। उन्हें ठीक होने का मौका दीजिए। उन्हें और परेशान मत कीजिए।

अगली बार जब आप कुछ मसालेदार या डीप-फ्राइड खाने की सोचें, तो बस एक बार अपने बवासीर के दर्द को याद कर लेना!

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